चले आइए

मस्त सावन का मौसम चले आइए पहन पायलिया छम-छम चले आइए ये बतायेंगे मिलकर तुम्हें रूबरू- कितने बेचैन हैं हम चले आईए। वैद्य सुदेश यादव दिव्य

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