एक मधुर संवेदना भरमा गयी

एक मधुर संवेदना भरमा गयी याद फिर अपने वतन की आ गयी वक़्त की स्याही क़लम की श्वांस भर जिंदगी की आरती लिखवा गयी। कवि विजय प्रेमी

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